सरदारशहर एक्सप्रेस न्यूज। आईजीएनपी पर आधारिता आपणी योजना फेज-प्रथम, चूरू-बिसाऊ परियोजना एवं सरदारशहर के 60 गांवों की पुर्नगठन की परियोजना में चूरू जिले के चूरू, सरदारशहर एवं तारानगर क्षेत्रों के 389 गांव शामिल किए गए हैं।
योजना के अंतर्गत पार्ट 1 (धन्नासर फीडर) एवं पार्ट 2 (कर्मसाना फीडर) में विभिन्न कार्य किए जाने है, जिनकी निविदा का तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है। पार्ट 3 (तारानगर-पाण्डुसर ) एवं पार्ट 4 (चूरू-बिसाऊ) की निविदाएं खोली जा चुकी हैं।
यमुना के पानी से बुझेगी प्यास
केन्द्र सरकार, हरियाणा सरकार और राजस्थान सरकार के बीच पिछले दिनों हुए त्रिपक्षीय एमओयू के तहत ताजेवाला हेड वक्र्स की संयुक्त डीपीआर पर सहमति बनी है। इस योजना के मूर्त रूप लेने के बाद राजस्थान को ताजेवाला हेड-वक्र्स से यमुना नदी का पानी मिल सकेगा और बारिश में व्यर्थ बह जाने वाले जल का भी समुचित उपयोग हो सकेगा। प्रोजेक्ट में चार भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जाएंगी, जिनमें से तीन पाइपलाइन के माध्यम से यमुना नदी का पानी राज्य के तीन जिलों सीकर, चूरू और झुंझुनू को उपलब्ध कराया जायेगा। काफी समय से लंबित इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद शेखावाटी क्षेत्र के तीन जिलों सीकर, चूरू और झुंझुनू की पेयजल समस्या का समाधान हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि यमुना जल पर मई 1994 में संपादित समझौते के अनुसरण में राजस्थान को हरियाणा स्थित ताजेवाला हेड पर मानसून के दौरान 1917 क्यूसेक जल आवंटित है। वर्तमान में ताजेवाला हेड से राजस्थान को जल लाने हेतु कैरियर सिस्टम उपलब्ध नहीं है। ताजेवाला हेड पर आवंटित जल के राजस्थान में पेयजल उपयोग हेतु प्रथम चरण की संयुक्त रूप से डीपीआर बनाने हेतु एमओयू हुआ है। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत सिधमुख के पास पेयजल भंडारण किया जाएगा। पेयजल के साथ सिंचाई का क्षेत्र भी इससे बढेगा, ऎसी उम्मीद है।











