सूरतगढ़ एसडीएम के आदेश के खिलाफ सरदारशहर में आक्रोश, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

सरदारशहर एक्सप्रेस/ मनीष पांडिया। सूरतगढ़ उपखंड अधिकारी भरत जयप्रकाश मीणा द्वारा नायक और धानका जाति के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्रों को अवैध घोषित करने के आदेश के बाद समाज में गहरा रोष व्याप्त है। सोमवार को सरदारशहर के नायक व धानका समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने उपखंड अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि सूरतगढ़ एसडीएम भरत जयप्रकाश मीणा द्वारा 11 मार्च को जारी में एक आदेश (क्रमांक: जा.प्र.प./2026/159) जारी किया गया है। इस आदेश में नायक, नायका, धानक और धानका जातियों को अनुसूचित जनजाति के दायरे से बाहर करने और उनके पूर्व में जारी प्रमाण पत्रों को अवैध घोषित करने की बात कही गई है। समाज के प्रबुद्धजनों का कहना है कि ये जातियां दशकों से संवैधानिक रूप से अनुसूचित जनजाति वर्ग में सम्मिलित हैं। स्थानीय स्तर पर एसडीएम द्वारा ऐसा आदेश जारी करना सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि आदेश में स्थानीय बोलचाल और जातिगत नामों की व्याख्या गलत तरीके से की गई है, जो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के नियमों के विरुद्ध है। इस एकतरफा फैसले से हजारों युवाओं, छात्रों और सरकारी कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। परीक्षाओं और नियुक्तियों में उनके प्रमाण पत्रों की वैधता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। समाज के युवाओं ने मांग की है कि इस विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने इस मामले में त्वरित और संवेदनशील निर्णय नहीं लिया, तो समाज राज्य स्तर पर उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा। ज्ञापन देने में  गुरू धानका, खींवाराम नायक, डूंगर नायक, निरंजन धानका, मुनीराम नायक, गिरधारी लाल धानका, सुरेन्द्र कुमार नायक, भंवरलाल नायक, हनुमान नायक, समुन्द्रराम नायक, महंत मुनीनाथ नायक, महंत श्यामनाथ नायक, सोनू नायक कल्याणपुरा, बुद्धाराम करनसर, सहीराम, चुनीलाल, टीकूराम जीवनदेसर सहित समाज के अनेक युवा और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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