सरदारशहर एक्सप्रेस 27 दिसंबर 2025/ मनीष पांडिया। कंदोई परिवार की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के सप्तम दिवस पर कथा स्थल भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कथावाचक आचार्य पं. बालकृष्ण कौशिक ने राम–हनुमान मिलन एवं सुग्रीव मैत्री के प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण, प्रेरणादायी और जीवंत वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे। आचार्य कौशिक ने बताया कि माता सीता की खोज में वन-वन भटकते हुए श्रीराम और लक्ष्मण का प्रथम मिलन परम भक्त हनुमानजी से होता है।
यह मिलन भक्ति और विश्वास का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हनुमानजी का श्रीराम के प्रति समर्पण, विनम्रता और सेवा भाव मानव जीवन के लिए आदर्श है। कथा में आगे सुग्रीव मैत्री का विस्तार से वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि श्रीराम ने निष्काम भाव से सुग्रीव की सहायता कर उसे बाली के अत्याचार से मुक्त कराया और किष्किंधा का राजा बनाया। बदले में सुग्रीव ने माता सीता की खोज में संपूर्ण वानर सेना के साथ श्रीराम का साथ देने का संकल्प लिया। यह प्रसंग मित्रता, धर्म, विश्वास और कर्तव्यबोध की श्रेष्ठ मिसाल प्रस्तुत करता है।
आचार्य पं. बालकृष्ण कौशिक ने कहा कि श्रीराम कथा केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन को मर्यादा, सेवा, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाली जीवन पद्धति है। कार्यक्रम के दौरान कंदोई परिवार की ओर से अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।
कथा में प्रवीण गोयल विकास अग्रवाल, प्रवीन रिंगसीया, प्रमोद मित्तल, हुकमचंद अग्रवाल, विश्वनाथ रातूसरीया, नवल जैसनसरीया, प्रकाश नाई, शिवभगवान सैनी, प्रकाश पुलासरिया, बजरंग बुच्चा, राजकुमार सींगी, दिलीप सुराना, विजय कुमार बोथरा, राकेश टिकरी वाला, शिवशंकर जैसनसरीया, पार्षद पिंटू नाई, अमरचंद मीणा, महावीर माली, नरेश कंदोई, नीरज कंदोई, मनोज भालेरीवाला, पवन पोद्दार, अजीत कंदोई, डॉ. पूनमचंद नाई, सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सप्तम दिवस की श्रीराम कथा: राम–हनुमान मिलन और सुग्रीव मैत्री का भावपूर्ण वर्णन











