सरदारशहर से मनीष पांडिया की रिपोर्ट। नव निर्मित श्याम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित पाँच दिवसीय श्री श्याम कथा का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा में श्याम प्रभु की दिव्य महिमा एवं प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान पर रतनगढ़ के कथावाचक श्री कृष्णानन्द महाराज ने कहा कि खाटू श्याम जी की प्राण-प्रतिष्ठा केवल मूर्ति स्थापना नहीं, बल्कि देवत्व के जागरण और दिव्य चेतना के आवाहन का पावन संस्कार है। जब वैदिक मंत्रोच्चार, विधि-विधान और श्रद्धा के साथ प्राण-प्रतिष्ठा होती है,
तब निर्जीव प्रतीत होने वाली प्रतिमा में ईश्वरीय शक्ति का संचार होता है और वह स्थान तीर्थ स्वरूप बन जाता है।उन्होंने श्याम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा, “जहाँ श्याम का नाम गूँजता है, वहाँ निराशा का अंधकार स्वतः मिट जाता है। श्याम नाम ही जीवन का संबल है, श्याम नाम ही कलियुग का आधार है।” कथा के दौरान भक्तों ने भावविभोर होकर भजन-कीर्तन किया और संपूर्ण वातावरण “जय श्री श्याम” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, विद्वान ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ संपादित कर प्राण-प्रतिष्ठा करवाई गई। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती, प्रसाद वितरण एवं आशीर्वचन हुआ। ग्रामवासियों ने इसे अपने गाँव के आध्यात्मिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया और श्याम प्रभु की कृपा के लिये कृतज्ञता व्यक्त की। आयोजन में पंडित केशरी शर्मा, गिरीश लाटा, रामोतार जोशी, भंवर सिंह बिका, रूमानंद पारिक, गंगाराम जोशी, प्रेम आचार्य, नेमदास स्वामी, सत्यनारायण सेवदा, प्रकाश चौहान, रामलाल पेड़ीवाल आदि श्रोताजन उपस्थित रहे।
प्राण प्रतिष्ठा के साथ संपन्न हुई श्री श्याम कथा










