सरदारशहर एक्सप्रेस 24 दिसंबर 2025/ मनीष पांडिया। कंदोई परिवार की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा स्थल श्रद्धा, भक्ति और करुण भावनाओं से सराबोर रहा। कथावाचक आचार्य पं. बालकृष्ण कौशिक ने भरत चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी वर्णन करते हुए श्रोताओं को भक्ति रस में डुबो दिया। कथावाचक ने कहा कि भरत भारतीय संस्कृति में त्याग, भक्ति और आदर्श भ्रातृत्व का सर्वोच्च प्रतीक हैं।
उन्होंने बताया कि भरत का चरित्र यह सिखाता है, कि सत्ता और वैभव से बड़ा धर्म भाई के प्रति समर्पण होता है। जब भरत को राम वनवास का समाचार मिला, तो उनका हृदय व्यथित हो उठा। राज्य प्राप्ति को उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया और राम को अयोध्या लौटाने के लिए वन तक गए। कथा में भरत का राम के चरणों में गिरकर विलाप करना, पादुका स्वीकार कर अयोध्या लौटना तथा नंदीग्राम में तपस्वी जीवन व्यतीत करने का सजीव चित्रण किया गया। राम-भरत मिलन प्रसंग सुनकर कथा पंडाल भावनाओं से भर उठा और अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पं. कौशिक ने कहा कि भरत का जीवन आज के समाज के लिए आदर्श है, जो बताता है कि सच्चा सुख त्याग, सेवा और कर्तव्य पालन में निहित है। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों और संगीतमय झांकियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर कथा में नरेश कंदोई, नीरज कंदोई, हनुमान कंदोई, गौरीशंकर कंदोई, शिवरतन कंदोई, बनवारीलाल जांगीड़, मनोज भालेरी वाला, पवन पोद्दार, संजय कंदोई, विनोद उड़सरिया, संतोष सर्राफ, राकेश पंसारी, महेश पंसारी, भरत मिश्रा, ललित जैसनसरिया, अजीत कंदोई, रौनक कंदोई, सोहनलाल पारीक, पवन कंदोई, मुखराम नाथोलिया, जितेंद्र स्वामी, रतनलाल भोजक, दयानंद कंदोई, तेजकरण चौधरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सच्चा सुख त्याग, सेवा और कर्तव्य पालन में निहित है: पं बालकृष्ण कौशिक










