सरदारशहर एक्सप्रेस / मनीष पांडिया। राजधानी जयपुर की सड़कों पर सोमवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब सैकड़ों पत्रकारों ने सिस्टम के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। मामला सिर्फ विरोध का नहीं था, बल्कि यह पत्रकारों की अस्मिता और आजीविका से जुड़ा आक्रोश था, जो सेंट्रल पार्क गेट नंबर 01 से उठकर अब शहीद स्मारक तक पहुंच चुका है।
क्या है पूरा मामला?
आईएफडब्ल्यूजे (Indian Federation of Working Journalists) के आह्वान पर प्रदेशभर से पत्रकार जयपुर पहुंचे। आरोप है कि प्रशासन की आड़ में पत्रकारों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। जैसलमेर में 20 साल से संचालित एक रिसोर्ट पर हाल ही में बुलडोजर चलाने की घटना ने इस आक्रोश को और भड़का दिया। पत्रकारों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
इंतजार से बढ़ा गुस्सा
पत्रकारों को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए शाम 5 बजे का समय दिया गया था, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे नाराज पत्रकारों ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की अनदेखी बताया।
आईएफडब्ल्यूजे के प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा—
“जब पत्रकारों को ही घंटों इंतजार करवाया जाए, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।”
अब क्या होगा?
लगातार उपेक्षा से आहत संगठन ने अब बड़ा फैसला लिया है— शहीद स्मारक पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो चुका है।
यह धरना सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि चेतावनी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।
अंदरूनी नाराजगी भी आई सामने
धरने के दौरान कुछ पत्रकारों ने अपने ही साथियों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि कई पत्रकारों को जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई समर्थन नहीं दिया, जिससे संगठन को अकेले संघर्ष करना पड़ा।
निष्कर्ष
जयपुर का यह आंदोलन अब एक बड़े संघर्ष का रूप लेता दिख रहा है। सवाल सिर्फ एक रिसोर्ट या कुछ मुकदमों का नहीं, बल्कि पत्रकारों की स्वतंत्रता और सम्मान का है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख तय करेगा कि यह आंदोलन कितना लंबा और कितना प्रभावशाली होगा।












