राम–रावण युद्ध एवं श्रीराम राज्याभिषेक का भव्य वर्णन, नवम दिवस की श्रीराम कथा

सरदारशहर एक्सप्रेस 29 दिसंबर 2025/ मनीष पांडिया। कंदोई बग़ीची में आयोजित श्रीराम कथा के नवम दिवस पर कथा स्थल श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से सराबोर नजर आया। व्यासपीठ से कथावाचक पं. आचार्य बालकृष्ण कौशिक ने राम–रावण युद्ध तथा श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग का अत्यंत ओजस्वी, भावपूर्ण और प्रेरणादायी वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा में बताया गया कि धर्म और अधर्म के महासंग्राम में भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर असत्य, अहंकार और अधर्म का अंत किया। राम–रावण युद्ध का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि यह युद्ध केवल अस्त्र-शस्त्र का नहीं, बल्कि सद्गुणों और दुर्गुणों के बीच संघर्ष का प्रतीक है। प्रभु श्रीराम की मर्यादा, संयम और करुणा ने यह संदेश दिया कि अंततः धर्म की ही विजय होती है। रावण वध के उपरांत अयोध्या लौटने पर श्रीराम के राज्याभिषेक का भव्य प्रसंग प्रस्तुत किया गया। राज्याभिषेक के समय अयोध्या की प्रसन्नता, पुष्प वर्षा और जन-जन के हर्षोल्लास का जीवंत चित्रण किया गया। कथावाचक ने कहा कि रामराज्य का अर्थ केवल सत्ता नहीं, बल्कि न्याय, समता, सेवा और लोककल्याण की स्थापना है, जहां प्रजा सुखी और सुरक्षित रहती है। कथा के दौरान श्रद्धालु “जय श्रीराम” के जयकारों के साथ भावविभोर नजर आए। नवम दिवस की रामकथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। कथा में संत दयानाथ जी महाराज उदासर आश्रम, राजगढ पूर्व जिला प्रमुख कमला कस्वां, मोहर सिंह पोटलीया, इंद्राज सारण, मोतीलाल जाखड, प्रकाश सर्राफ, गोविंदराम भालेरीवाले भंवरलाल जी जैसनसरीया, रामरतन मित्तल सुनील सर्राफ, मानकचंद भाटी, बृजमोहन सर्राफ, सुनील मिश्र, पार्षद शोभाकांत स्वामी, मनोज भालेरीवाला, नरेश कंदोई,पवन पोद्दार, संजय कंदोई, गौरीशंकर कंदोई, पवन कंदोई, संदीप कंदोई सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा आयोजन के दौरान कंदोई परिवार की ओर से आगंतुकों का दुपट्टा ओढ़ाकर एवं प्रभु श्रीराम की प्रतिमा भेंट कर भव्य स्वागत-सत्कार किया गया।

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