ऋषिकुल आश्रम सरदारशहर में विश्व शांति हेतु शांति यज्ञ का आयोजन

भारत की सनातन भावना – ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का दिया गया सशक्त संदेश

सरदारशहर एक्सप्रेस/ मनीष पांडिया। वर्तमान समय में विश्व के अनेक देशों के बीच बढ़ते तनाव एवं विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध जैसे हालातों ने वैश्विक शांति को गम्भीर चुनौती दी है। इन परिस्थितियों का प्रभाव सम्पूर्ण विश्व के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में सरदारशहर स्थित ऋषिकुल आश्रम ने अपनी सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए एक प्रेरणादायी पहल की। आज ऋषिकुल आश्रम सरदारशहर में आचार्यों एवं वटुकों द्वारा विश्व शांति के लिए विशेष शांति पाठ एवं शांति यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि एवं यज्ञ की दिव्य आहुतियों से सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण हेतु एक सशक्त संकल्प के रूप में सामने आया। इस अवसर पर आश्रम के अध्यक्ष श्री हुलासमल व्यास ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की सनातन संस्कृति सदैव “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” की भावना पर आधारित रही है। जब-जब विश्व में अशांति और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई है, तब-तब सनातन धर्म के अनुयायियों ने न केवल शांति का संदेश दिया है, बल्कि उसे स्थापित करने के लिए आध्यात्मिक साधनों के माध्यम से अपना पूर्ण योगदान भी दिया है।उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हमेशा “युद्ध नहीं, बुद्ध” का मार्ग अपनाया है। यह देश शस्त्र से अधिक शास्त्र की शक्ति में विश्वास रखता है। आज भी ऋषिकुल आश्रम के माध्यम से यही संदेश सम्पूर्ण विश्व को दिया जा रहा है कि युद्ध की यह विभीषिका शीघ्र समाप्त हो और समस्त विश्व में शांति, प्रेम एवं सद्भाव का वातावरण स्थापित हो। इस आयोजन में पण्डित डॉ. बालकृष्ण कौशिक, मदनलाल बबेरवाल, बजरंग लाल पांडिया सहित संस्थान के सभी आचार्य एवं अध्यापकगण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में विश्व कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में आहुतियाँ प्रदान कीं। ऋषिकुल आश्रम द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को यह भी प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच, प्रार्थना और संस्कारों के माध्यम से शांति की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकते हैं। यह आयोजन वास्तव में भारत की महान संस्कृति, उसकी सहिष्णुता और विश्व बंधुत्व की भावना का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी सनातन परंपरा विश्व को शांति का मार्ग दिखाने में सक्षम है।

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